डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कोरोनावायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर लोगों की चिंताओं को दूर किया। नीति आयोग के सदस्‍य-स्‍वास्‍थ्‍य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि डेल्‍टा प्‍लस से अभी चिंता की बात नहीं है। उपलब्‍ध डेटा के अनुसार, यह वैरिएंट मोनोक्‍लोनल एंटीबॉडी को निष्क्रिय कर देता है। अभी इस वैरिएंट के बारे में और अध्‍ययन किया जा रहा है।

डॉ. वीके पॉल ने कहा, दूसरी लहर में डेल्टा वैरिएंट ने प्रमुख भूमिका निभाई। इस वैरिएंट के एडिशनल म्यूटेशन, डेल्टा प्लस का पता लगाया गया है और ग्लोबल डेटा सिस्टम को सबमिट किया गया है। यह मार्च में यूरोप में देखा गया और 13 जून को पब्लिक डोमेन में लाया गया। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (पीएचई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक डेल्टा प्लस वैरिएंट के कुछ 63 मामले मिल चुके हैं। इस में से छह भारत से हैं। पीएचई को डेल्टा वैरिएंट में बदलावों की रुटीन जांच के दौरान डेल्टा प्लस का पता चला।

इससे पहले काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च- इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायलॉजी (सीएसआईआर-आईजीआईबी) के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने भी कहा था, अभी वायरस के इस प्रकार को लेकर भारत में चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा था कि वैक्सीन की पूरी डोज ले चुके लोगों के ब्लेड प्लाज्मा से वायरस के इस वैरिएंट का टेस्ट करना होगा जिससे पता चलेगा कि यह इम्युनिटी को चकमा दे पाता है या नहीं।

बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में भारत में तबाही मचाने वाले डेल्टा वैरिएंट को बी.1.617.2 के नाम से भी जाना जाता है। इस वैरिएंट में म्‍यूटेशन के कारण नया डेल्‍टा प्‍लस वैरियंट बना है। इसे AY.1 भी कहा जा रहा है।  अब तक जो डेटा सामने आया है उसके अनुसार इस वैरिएंट पर मोनोक्‍लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल का असर नहीं होता है। मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज कॉकटेल एक दवा है, जो कोरोना के इलाज में प्रयोग की जाती है।



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