डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 25 जुलाई को सुबह लगभग 3 बजे एक बड़े एस्टेरॉइड के पृथ्वी के करीब से गुजरने की उम्मीद है। इस एस्टेरॉइड का नाम है ‘2008 GO20’। ये एक फुटबॉल मैदान से बड़ा है जिसकी लेंथ 200 मीटर के करीब है। नासा के अनुमानों के अनुसार, यह 8.2 किमी प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी के पास से गुजरेगा और हमारे ग्रह से लगभग तीन से चार मिलियन किलोमीटर दूर होगा। यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का लगभग आठ से नौ गुना है।

इससे पहले ये एस्टेरॉइड 20 जून 2008 को पृथ्वी के करीब से गुजरा था। 25 जुलाई 2034 में भी इसके पृथ्वी के करीब से गुजरने की उम्मीद है। 2008 GO20 को अपोलो NEO के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अपोलोज की हमारी पृथ्वी के पास एक कक्षा है और जब वे पृथ्वी की कक्षा को क्रॉस करते हैं तो उन्हें अर्थ-क्रॉसर्स भी कहा जाता है। उनका नाम 1862 के अपोलो एस्टेरॉइड के नाम पर रखा गया है।

क्या होता है NEO?
नासा के अनुसार, NEO एस्टेरॉइड और कॉमेट हैं जो पृथ्वी के करीब आते हैं। इनमें से अधिकांश NEO एस्टेरॉइड हैं और इन्हें नियर-अर्थ एस्टेरॉइड्स (NEAs) कहा जाता है। NEAs को उनकी दूरी और एक्सेस के आधार पर आगे अतीरा, एटेन, अपोलो और अमोर में डिवाइड किया गया है। 

नियर-अर्थ एस्टोरॉइड जो 0.05 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट से नीचे या 7.5 मिलियन किमी दूर फ्लाई करते हैं उन्हें संभावित रूप से खतरनाक एस्टोरॉइड्स (PHA) कहा जाता है। क्योंकि 2008 GO20 एस्टोरॉइड 0.02 से 0.03 au की दूरी से गुजरेजा इसलिए यह एक PHA है। एक एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट लगभग 150 मिलियन किमी या लगभग पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी है।



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