डिजिटल डेस्क, दिल्ली। अमेरिका और रूस दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष नया इतिहास रचने जा रहे हैं. दोनों देशों के प्रमुख राष्ट्रपति जो बाइडेन और राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिनी की स्विटरलैंड में अहम बैठक बस शुरू ही होने वाली है. इस मुलाकात पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. खुद विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों की बैठक भारत के लिए अच्छी खबर लेकर आ सकती है. 

अमेरिका-रूस की बैठक के मायने
अमेरिका और रूस की जिनेवा में होने वाली इस बैठक कई अहम मायने निकाले जा रहे हैं. माना जा रहा है कि दोनों देश कई जटिल मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं. 18 वीं शताब्दी में बने एक आलीशान विला में दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक दूसरे के आमने सामने होंगे. ये बैठक तकरीबन चार से पांच घंटे चलने की संभावना है. जिसमें हथियार नियंत्रण प्राथमिकता, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वकांक्षाओं पर चर्चा हो सकती है. हालांकि अमेरिका अपनी तरफ से ये साफ कर चुका है कि पहले ही बैठक में उसे किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है. इस बैठक में सिर्फ ये प्रयास होंगे कि दोनों देशों के बीच स्थिर संबंध बने रहें. 

भारत के लिए क्यों है अच्छी खबर?
बाइडने और पुतिन की मुलाकात दोनों देशों के आपसी संबंधों पर जितना प्रभाव डालेगी. तकरीबन उतना ही असर भारत पर भी पड़ सकता है. अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका और रूस के बीच रिश्ते बेहतर होने पर जाहिरतौर पर चीन को संतुलित रखना भारत के लिए आसान हो जाएगा. दोनों के साथ होने से भारत खुद को एशिया में अब अकेला महसूस नहीं करेगा. माना जा रहा है कि अमेरिका की कोशिश भी चीन पर नकेल कसने की ही है. 

बैठक पर अमेरिका की राय
बैठक पर अमेरिका पहले ही अपना स्टैंड क्लीयर कर चुका है. अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन कह चुके हैं कि फिलहाल इस बैठक के ठोस नतीजे पर पहुंचने की कोई उम्मीद नहीं है. फिलहाल हम समिट हो रही है और दोनों देशों के राष्ट्रपति बातचीत कर रहे हैं इसे से संतुष्ट हैं. साथ ही अमेरिका ने ये आगाह भी किया है कि अगर बैठक के बाद भी अमेरिका के खिलाफ सायबर या अन्य नुकसानदायी गतिविधियां जारी रहती हैं तो अमेरिका उसका भी जवाब देने के लिए तैयार है.



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