डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को धूमावती जयंती (Dhumavati Jayanti) मनाई जाती है। धूमावती माता पार्वती का ही रूप है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, मां पार्वती ने भूख से व्‍याकुल होकर अपने पति भगवान शिव को निगल लिया था। इसलिए उनका यह रूप बड़ा भयंकर है और विधवा रूप में है। इस बार धूमावती जयंती 18 जून, शुक्रवार को है। इस दिन माता धूमावती की पूजा उपासना करने से व्रती को यथाशीघ्र मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। 

माना जाता है कि, माता धूमावती पापियों को दण्डित करने के लिए वे अवतरित हुई थीं। ऋषि दुर्वासा, भृगु, परशुराम की मूल शक्ति धूमावती माता ही हैं। इनकी पूजा करने से विपत्तियों से मुक्ति, रोग का नाश और युद्ध में विजय के अलावा बड़े से बड़ा संकट टल जाता है और हर काम में विजय प्राप्‍त होती है। आइए जानते हैं पूजा विधि…

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स्त्रियों को नहीं करना चाहिए पूजा!
धूमावती जयंती के दिन माता सती के धूमावती स्वरूप की पूजा-उपासना पूरी श्रद्धा और विधि विधान से की जाती है। माँ की कृपा से प्राणी धर्म, अर्थ काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ प्राप्त कर लेता है। लेकिन ऐसी मान्यता है कि, स्त्रियों को माता धूमावती की पूजा नहीं करनी चाहिए। इससे उनमें एकाग्रता का भाव जागृत होती है, जो भौतिक जीवन के लिए सही नहीं होता है। इसे तंत्र साधना करने वाले साधक करते हैं।  

ऐसे करें मां धूमावती की पूजा
– सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्यक्रमादि से निवृत्त होकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। 
– इसके बाद भगवान सूर्य को जल चढ़ाएं।
– पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें अथवा गोबर से लीप लगाएं।
– माँ को मीठी रोटी और घी से सर्वोत्तम भोग लगाएं।
– माँ को सफेद रंग के फूल, आक के फूल, सफेद वस्त्र भेंट करें।
– अब गंगाजल के साथ केसर, कुमकुम, अक्षत, धतूरा, आक, सुपारी दूर्वा, फल, शहद, कपूर, चन्दन, नारियल पंचमेवा चढ़ाएं।
– दीप जलाएं और घी, सफेद तिल, जौ आदि का होम के लिए उपयोग करें।  
– होम करने से से जीवन आया बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है। 

इस मंत्र का जाप करें
ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्॥
धूं धूं धूमावती ठः ठः ॥

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पौराणिक कथा
माता धूमावती को लेकर कई पौराणिक कथाएं हैं। इनमें से एक में कहा गया है कि जब भगवान शिव की पत्नी पार्वती ने भूख लगने पर उनसे कुछ खाने की मांग की। तब भगवान शिव ने उन्हें कुछ खाने का प्रबंध करने का आश्वासन दिया, लेकिन कुछ देर बाद भी भोजन की व्यवस्था नहीं कर सके। ऐसे में पार्वती ने भूख से बेचैप होकर भगवान शिव को निगल लिया, लेकिन शिवजी के गले में विष होने के चलते माता पार्वती के शरीर से धुंआ निकलने लगा और जहर के प्रभाव से उनका रूप भयंकर नजर आने लगा। 

भूख लगने पर अपने ही पति को निगल लेने के कारण भगवान शिव का अभिशाप उन्हें लगा और उन्हें एक विधवा के रूप में पूजा जाता है। कथा के अनुसार, भगवान शिव ने पार्वती से कहा कि, तुम्हारे इस रूप को धूमावती के नाम से जाना जाएगा। इस रूप में वे एक हाथ में तलवार धारण किए हुए नजर आती हैं और यह स्वरूप काफी क्रूर है।



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