लखनऊ, 17 जून। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आखिरकार पार्टी कार्यकतार्ओं को इनाम देना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने बुधवार को भाजपा के पूर्व विधायक रामबाबू हरित को राज्य एससी, एसटी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया। नवंबर 2019 में पिछले प्रमुख बृजलाल की सेवानिवृत्ति के बाद से आयोग बिना मुखिया के था।

सरकार ने मिथिलेश कुमार और राम नरेश पासवान को आयोग का उपाध्यक्ष नयुक्त किया और 15 सदस्य भी नियुक्त किए हैं। आयोग के मनोनीत सदस्यों में साध्वी गीता प्रधान, ओम प्रकाश नायक, रमेश तूफानी, राम सिंह वाल्मीकि, कमलेश पासी, शेषनाथ आचार्य, तीजा राम, अनीता सिद्धार्थ, राम असरी दिवाकर, श्याम अहेरिया, मनोज सोनकर, श्रवण गोंड अमरेश चंद्र चेरो, किशन लाल सुदर्शन और केके राज शामिल हैं। पदाधिकारी और सदस्य नियुक्ति की तारीख से एक वर्ष के लिए या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, तब तक कार्यभार संभालेंगे।

बीजेपी का बड़ा सियासी दांव

विधानसभा चुनाव से पहले इस नियुक्ति को बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है। दरअसल मोदी लहर में बीजेपी ने आगरा की सभी नौ विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया था. यही वजह है  कि बीजेपी  आगरा को ज्यादा तवज्जो दे रही है. पिछड़ा वर्ग को साधने के लिए माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष धर्मवीर प्रजापति को विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। अब रामबाबू हरित की नियुक्ति को भी इसी कड़ी में बड़ा फैसला माना जा रहा है।



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