डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। फूड प्रोडक्ट की बढ़ी कीमतों के कारण मई में खुदरा महंगाई दर पिछले महीने के  4.23% से बढ़कर 6.3% हो गई है। ये 6 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। फूड प्रोडक्ट की महंगाई दर मई में 5.01 फीसदी रही, जो उसके पिछले महीने के 1.96 फीसदी से बहुत ज्यादा है। सरकार ने रिजर्व बैंक के सामने खुदरा महंगाई दर को 4 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य दिया था, जिसमें दो फीसदी का मार्जिन था। लेकिन अब ये आरबीआई के लिए निर्धारित लक्ष्य के दायरे से बाहर चली गई है।

इनमें हुई बढ़ोतरी और इनमें आई गिरावट 
सेंट्रल स्टेटस्टिक्स ऑफिस आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर फूड प्राइज इंफ्लेशन अप्रैल के 1.96% के मुकाबले मई में बढ़कर 5.01% पर पहुंच गया। सब्जियों की महंगाई दर भी -14.18% से बढ़कर -1.92% हो गई है। फ्यूल एंड लाइट इन्फ्लेशन अप्रैल के 7.91% के मुकाबले बढ़कर 11.58% हो गई है। हाउसिंग इंफ्लेशन अप्रैल में 3.73% थी जो मई में बढ़कर 3.86% पर पहुंच गई है। कपड़ों और जूतों की महंगाई दर 3.49% के मुकाबले बढ़कर 5.32% हो गई। दालों की महंगाई दर 7.51% के मुकाबले बढ़कर 9.39% हो गई है।

क्या होता है CPI इंडेक्स?
CPI यानि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक। यह रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी की करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य और पेय पदार्थ से जुड़ी चीजों और एजुकेशन, कम्युनिकेशन, ट्रांसपोर्टेशन, रीक्रिएशन, अपैरल, हाउसिंग और मेडिकल केयर जैसी सेवाओं की कीमतों में आ रहे बदलावों को शामिल किया जाता है।



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