Publish Date: | Sun, 27 Jun 2021 08:30 AM (IST)

Bank update: कोरोना महामारी में लाॅकडाउन के डर से लोगो ने अपने बैंक खाते से एक साथ ही पैसे निकाल लिए और फिर कुछ महीनों तक उसमें किसी भी प्रकार का कोई ट्रांजेक्शन नहीं किए। जिस वजह से अकाउंट ‘इनऑपरेटिव’ या बंद हो गया है। अब ये खाता तब ही शुरू हो सकता है जब आप बैंक में जाकर दोबारा से अपना अकाउंट शुरू करने के लिए आवेदन देगें। आपके आवेदन देने के बाद ही पूछताछ व जरूरी अपडेशन कर के ही खाता को शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसे में जरूरी है कि आपको पता हो कि आपका खाता बंद या इनऑपरेटिव हो चुका है।

सोशल मीडिया के ट्विटर प्लेटफाॅर्म से यह शिकायत सामने आई है कि ग्राहकों का बैंक खाता बंद कर दिया गया है। दरअसल एक ग्राहक ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत ट्विटर के माध्यम से करते हुए बताया कि उनके बेटे का अकाउंट लाॅक कर दिया गया है सिर्फ इस बात पर कि एक नियत समय तक उस खाते से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ है। खातेदार इस विषय पर बताते हैं कि बैंक ने इस बात की पाॅलिसी बनाई है कि अगर एक निश्चित अवधि तक खाते से ट्रांजेक्शन न हो तो उसे निष्क्रिय या इनऑपरेटिव कर दिया जाएगा।

बैंक में आवेदन देना होगा

एसबीआई के ग्राहक के पास बैंक की तरफ से फोन पर इस बात का मैसेज गया है कि अकाउंट बंद कर दिया गया है और उसे पुनः शुरू कराने के लिए ब्रांच जाना होगा। जब से बैंक द्वारा इस तरह की पाॅलिसी बनाई गई है तब से ही लोगों द्वारा इसकी आलोचना की जा रही है। ग्राहकों का कहना है कि सरकार भीड़-भाड़ रोकने के लिए हर तरह के जतन कर रही है। बैंको में भी कोरोना प्रोटोकाॅल का पालन किया जा रहा है। ऐसे में स्टेट बैंक ने ऐसी पाॅलिसी क्यों बनाई कि कोरोना के दौरान खाते बंद किए जा रहे हैं और उसे शुरू करवाने के लिए ब्रांच जाना पड़ रहा है। ऐसा होने से तो ब्रांच में ओर भीड़ बढ़ेगी। कोरोना का खतरा और पैदा होगा। बैंक द्वारा ऐसा नियम निकालना बेहद ही गलत है।

खाते में पड़े हैं पैसे फिर भी कर दिए बंद

बैंक खाते में ट्रांजेक्शन न होने के चलते ग्राहकों के अकाउंट को बंद कर दिया जा रहा है जबकि बहुत से खाताधारकों के अकाउंट में कई हजार रूपए पड़े हैं फिर भी ऐसे नियम उन पर लागू किए जा रहे हैं। कोरोना के दौरान बैंक की ये पाॅलिसी सरासर गलत बताई जा रही है। क्योंकि इससे कोरोना प्रोटोकाॅल का पालन कर पाना संभव नहीं है। बैंको द्वारा खाता बंद करने का कारण साइबर अपराध को रोकना है दरअसल अगर कोई खाता बहुत दिनों से बिना लेन-देन के पड़ा है तो अपराध का खतरा बढ़ सकता है। इसे देखते हुए बैंक खाते को इनऑपरेटिव कर देती है। ताकि उस खाते का गलत उपयोग न हो सके। बैंकों द्वारा ये नियम खाते की सुरक्षा के लिए ही बनाया गया है इस नियम को सरकार ने बनाया है न कि बैंक ने।

क्या कहता है नियम

हर बैंक का अपना एक अलग नियम होता है कि कितने दिन बाद बिना ट्रांजेक्शन के ग्राहकों का खाता इनऑपरेटिव कर दिया जाएगा। बैंकों की ओर से पासबुक या रूलबुक में इसकी पूरी जानकारी दी जाती है। इसे लेकर ऐसा भी हो सकता है कि हर बैंक के अलग-अलग खातों के अलग-अलग नियम हो और इन्ही नियमों के अनुसार आपके खाते में कोई भी डिपाॅजिट कर सकता है। लेकिन निकालने के लिए सिर्फ आपका होना जरूरी है। यह 2 साल के अंतराल में किया जाना चाहिए। अगर आप विड्राॅल नहीं करते हैं तो ऐसे में आपका खाता इनऑपरेटिव हो जाता है। फिर इसे दोबारा शुरू करने के लिए आपको केवाईसी कराना होगा।

ऐसे शुरू करें अपना बंद खाता

अगर समय के चलते आपका भी अकाउंट बंद कर दिया गया है तो घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि यह आपकी सुरक्षा के लिए ऐसा किया गया है। इसे दोबारा शुरू करने के लिए सभी बैंकों केवाईसी नियमों का पालन करना होगा। इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की कमी मिलने पर खाता इनऑपरेटिव कर दिया जाता है। इस तरह का खाता बंद होने पर आप एटीएम, नेटबैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस नियम को ऐसे समझें कि अगर खाते से डेबिट ट्रांजेक्शन नहीं होता है तो इसे बंद कर दिया जाता है। और यह सुरक्षा के लिहाज से सही भी है।

Posted By: Arvind Dubey

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