जम्मू: भारत और पाकिस्तान के बीच DGMO स्तर पर हुआ सीजफायर (Ceasefire) समझौता धीरे-धीरे सही दिशा में आगे बढ़ने लगा है. दोनों देशों में 24 फरवरी को समझौता होने के बाद जम्मू के कठुआ से लेकर कश्मीर के कुपवाड़ा तक अभी तक LoC पर एक भी गोली नही चली है. जिससे सरहदी इलाकों में रहने वाले लोगों ने  के लोगो ने राहत की सांस ली है.

लोगों को उम्मीद, दगाबाजी नहीं करेगा पाकिस्तान

लोगों ने उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान (Pakistan) इस बार दगाबाज़ी नहीं करेगा और सरहदी इलाकों में शांति बनाए रखेगा. समझौते के बाद से कठुआ,सांबा और जम्मू जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर  LoC के राजौरी,पुंछ, उड़ी, कुपवाड़ा के नियंत्रण रेखा से सटे गांवों में 15 साल बाद सकून दिख रहा है. पाकिस्तानी गोलाबारी से अक्सर दहशत और सन्नाटे में डूबे रहने वाले गांवों में खास चहल पहल है. लोग बेफिक्र होकर अपने खेतों में कामकाज कर पा रहे हैं. 

पाकिस्तानी शेलिंग से लोगों की जिंदगी चौपट हुई

बताते चलें कि भारत और पाकिस्तान में 2003 के सीजफायर (Ceasefire) एग्रीमेंट को फिर से लागू करने पर सहमति बन गई है. पाकिस्तान ने इस समझौते को 2006 में तोड़ दिया था. तब से पाकिस्तानी सेना संघर्ष विराम का उल्लंघन करके नियमित रूप से नागरिक ठिकानों पर गोलाबारी करती आ रही है. इस गोलाबारी में कई लोगो ने अपने परिजनों को खोया, कई परिवार अपने बच्चों को लेकर शहरी इलाकों में पलायन कर गए. पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी के खौफ से किसान अपने खेतों में काम करने नहीं जा पाते तो बच्चे भी शेलिंग के डर से स्कूल नही जा पाते थे.

पिछले साल पाकिस्तान ने 5133 बार तोड़ा सीजफायर

सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी (Pakistan) सेना ने वर्ष 2020 में 5133 बार जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में सीजफायर (Ceasefire) का उल्लंघन किया. उसकी इस हरकत का भारतीय सेना ने भी मुंह तोड़ जवाब दिया. जम्मू के हीरानगर सेक्टर में जीरो लाइन पर बसा बोबियां गांव तीन ओर से पाकिस्तान से घिरा हुआ है. गांव के लोगों का कहना है कि सीजफायर लागू होने से लोगों को राहत मिली है. अगर पाकिस्तान गोलाबारी नहीं करता है तो पाकिस्तान के लोगों को भी भारतीय सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई से राहत मिलेगी.  

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सीजफायर लागू होने से स्कूलों में भी रौनक लौटी

LoC पर गोलाबारी बंद होने से प्रभावित स्कूलों में भी अब पहले जैसी रौनक लौट आई है. सरहदों पर सीजफायर (Ceasefire) लागू होने का मतलब ये नहीं है कि सुरक्षा बलों ने बॉर्डर पर चौकसी में कोई ढील दे दी है. वास्तविकता ये है कि सुरक्षा बल अब सरहदों की निगरानी में पहले से ज्यादा चौकस है. उत्तरी कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल YK Joshi का कहना है कि आतंकियों और घुसपैठियों के खिलाफ  सेना के ऑपरेशन्स में कोई ढील नहीं दी गई है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने किसी तरह का कोई दुस्साहस करने की कोशिश की तो उसे करारा सबक सिखाया जाएगा. 

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