Publish Date: | Tue, 06 Jul 2021 06:22 PM (IST)

Explained: कोरोना वायरस किसी भी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीर रूप से खराब कर सकता है। अगर संक्रमण का स्तर मध्यम से गंभीर के बीच है, तो संभव है कि संक्रमण ने श्वसन प्रणाली को कुछ हद तक नुकसान पहुंचाया हो। यहां तक कि हल्के संक्रमण वाले मरीजों को भी सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि कोविड से अन्य लक्षण भी सामने आए हैं। ब्लैक फंगस, मधुमेह, रक्त के थक्कों, हृदय और श्वसन संबंधी समस्या विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। कोविड के बाद नई बीमारियां भी दिन पर दिन बढ़ रही है। अब कोरोना से ठीक हुए लोगों में बोन डेथ (Bone Death) के लक्षण सामने आए हैं।

मुंबई में एवैस्कुलर नेक्रोसिस (Avascular Necrosis) के तीन मरीजों का पता चला है। जिन्हें हड्डी के ऊतकों की मृत्यु भी कहा जाता है। कथित तौर पर 40 वर्ष से कम आयु के तीनों रोगियों का इलाज मुंबई के पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल में किया गया था। उन्हें कोरोना से ठीक होने के दो महीने बाद एवीएन (AVN) का पता चला। डॉक्टरों को डर है कि इस तरह के मामले बढ़ सकते हैं।

एवैस्कुलर नेक्रोसिस या बोन डेथ क्या है ?

एवैस्कुलर नेक्रोसिस खून की कमी के कारण हड्डी के टिश्यू की मृत्यु है। इसे ऑस्टियोनेक्रोसिस के रूप में जाना जाता है। जो हड्डी के टूटने का कारण बन सकता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार एक टूटी हुई बोन या अव्यवस्थित जोड़ हड्डी के एक हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित कर सकता है। एवैस्कुलर नेक्रोसिस का प्रमुख कारण स्टेरॉयड दवाई के लंबे समय तक उपयोग और अत्यधिक शराब का सेवन करना है। 30 से 50 वर्ष की आयु के लोगों में यह स्थिति आम है।

बोन डेथ या एवैस्कुलर नेक्रोसिस के लक्षण?

शुरुआती चरणों में लोगों को दर्द नहीं होता है, लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता है। यह जोड़ को प्रभावित कर सकता है। यहां तक की लेटने पर भी दर्द महसूस होगा। एवीएन कूल्हों, कमर, गर्दन, कंधे और घुटने को इफेक्ट करता है।

कोविड मरीज क्यों बोन डेथ के चपेट में आ रहे हैं?

बोन डेथ स्टेरॉयड के इस्तेमाल से जुड़ा है। जिन लोगों को कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनमें से ज्यादातर लोगों को स्टेरॉयड दवाई दी गई थी। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से रिकवर हुए मरीजों को बदन दर्द होने पर एमआरआई करवाना चाहिए।

क्या है बोन डेथ का इलाज?

बोन डेथ या एवैस्कुलर नेक्रोसिस के इलाज में फिजियोथेरपी, गैर-स्टेरॉयड दवाएं, व्यायाम और थेरेपी की जाती है। कई बार स्थिति गंभीर होने पर सर्जरी करानी पड़ती है।

Posted By: Navodit Saktawat

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 

Show More Tags



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here