Publish Date: | Thu, 01 Jul 2021 11:09 PM (IST)

Maharashtra State Cooperative Bank scam: प्रवर्तन निदेशालय ने सहकारी बैंक घोटाला मामले में 65.75 करोड़ की एक शुगर मिल को अटैच किया है। ये मिल जिस कंपनी की है, वो महाराष्ट्र सरकार के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा अजित पवार की है। आपको बता दें कि अजीत पवार NCP के दिग्गज नेताओं में शामिल हैं और पार्टी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे हैं।

क्या है पूरा मामला?

ED ने महाराष्ट्र सरकार की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) में साल 2019 में दर्ज मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरु की थी। आरोप था कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक ने बिना सरफेसी कानून (SARFAESI Act) का पालन किए, एक सहकारी चीनी मिल को बहुत कम दामों पर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को बेच दी। जब मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में गया तो महाराष्ट्र पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया और फिर ED ने भी अपनी जांच शुरू की।

जांच में पाया गया कि महाराष्ट्र के सतारा में मौजूद शुगर मिल Jarandeshwar SSK को साल 2010 में M/s Guru Comodity Service Pvt Ltd ने 65.75 करोड़ में खरीद लिया। इसके फौरन बाद उस कंपनी ने इस शुगर मिल को वापस Jarandeshwar Sugar Mills Pvt Ltd को लीज पर दे दिया। इस कंपनी की ज्यादातर हिस्सेदारी अजित पवार और उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार की कंपनी M/s Sparkling Soil Pvt Ltd के पास है। जब ये डील हुई, तब अजीत पवार महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक में डायरेक्टर के पद पर थे। उन पर अपनी ही कंपनी को शुगर मिल लीज पर देने का आरोप लगा। जांच में पता चला कि Jarandeshwar SSK को खरीदने के लिए जो पैसे आये थे, वो भी M/s Jarandeshwar Sugar Mills Pvt Ltd से ही आया था।

ED के मुताबिक M/s Guru Comodity Service Pvt Ltd एक डमी कंपनी थी, जिसका इस्तेमाल सिर्फ शुगर मिल को खरीदने के लिए किया गया था। इसके अलावा इस सहकारी शुगर कारखाने का इस्तेमाल पुणे डिस्ट्रिकट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से 700 करोड़ रुपये का लोन लेने के लिए किया गया था जो कि अभी भी बकाया है।

साल 2019 में मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) घोटाले में अजीत पवार और 70 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने 5,000 करोड़ रुपये के घोटाले में शरद पवार और अजीत पवार को नामजद किया था, लेकिन बाद में मुम्बई पुलिस ने सबूतों के अभाव में केस बंद कर दिया था। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस घोटाले में मुंबई पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को भी चुनौती देते हुए जांच शुरु की, जो अब भी चल रही है।

Posted By: Shailendra Kumar

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