Publish Date: | Mon, 05 Jul 2021 10:01 PM (IST)

SBI Research की ओर से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में मध्य अगस्त तक कोरोना वायरस की तीसरी लहर (Third Wave) आ सकती है। वहीं अगले महीने यानी सितंबर में ये अपने पीक पर होगी। रिपोर्ट में ये भी चेतावनी दी गई है कि ये दूसरी लहर से भी ज्यादा खतरनाक साबित होगी। सोमवार को जारी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) रिसर्च द्वारा प्रकाशित “कोविड-19: द रेस टू फिनिशिंग लाइन (Covid-19: the race to finishing line)” शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि वैक्सीनेशन ही एकमात्र बचावकर्ता है क्योंकि वैश्विक डेटा से पता चलता है कि औसतन, तीसरी लहर के मामले, दूसरी लहर के पीक मामलों से लगभग 1.7 गुना ज्यादा हैं। आपको बता दें कि भारत में अभी दूसरी लहर भी खत्म नहीं हुई है।

क्या कहती है रिपोर्ट?

रिपोर्ट के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष ने कहा कि भारत ने 7 मई को दूसरी लहर का पीक हासिल कर लिया है और मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, देश में जुलाई के दूसरे सप्ताह में लगभग 10,000 मामले ही होंगे। लेकिन ऐतिहासिक रुझानों के आधार पर, कम से कम एक महीने बाद चरम मामलों के साथ 21 अगस्त के दूसरे पखवाड़े तक मामले बढ़ने शुरू हो सकते हैं। वर्तमान मामले अभी 45,000 के आसपास ही हैं, यानी दूसरी लहर अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पहली लहर में भी, मामलों में धीरे-धीरे गिरावट आई, और किसी भी सार्थक गिरावट से पहले 21 दिनों के लिए लगभग 45,000 मामले सामने आए।

इसके अलावा ताजा स्थिति ये है कि 12 राज्यों से डेल्टा प्लस वैरिएंट के 51 मामलों का पता चला है। शीर्ष 15 जिलों में नए मामले, जो ज्यादातर शहरी हैं, जून में फिर से बढ़े। अच्छी बात यह है कि तीन महीने से इनकी मृत्यु दर स्थिर है। लेकिन नए मामलों में ग्रामीण जिलों की हिस्सेदारी जुलाई 2020 से सार्थक रूप से नहीं घट रही है और अभी भी 40-45 प्रतिशत के आसपास है।

क्या है इसका उपाय?

घोष ने कहा कि वैक्सीनेशन ही इसका एकमात्र जवाब लगता है। भारत ने प्रतिदिन 40 लाख से ज्यादा वैक्सीनेशन डोज देना शुरू कर दिया है। लेकिन भारत में केवल 4.6 प्रतिशत आबादी को पूरी तरह से वैक्सीन लगाया गया है, जबकि 20.8 प्रतिशत को एक डोज मिली है, जो अमेरिका (47.1 प्रतिशत), यूके (48.7 प्रतिशत), इजराइल (59.8 प्रतिशत) स्पेन (38.5 प्रतिशत), फ्रांस (31.2) में अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, केरल और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने 60 साल से ऊपर की आबादी के बड़े प्रतिशत को पहले ही दोनों डोज दिए हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में कुल वैक्सीनेशन कम है। तमिलनाडु, पंजाब, उत्तर प्रदेश, असम, बिहार और झारखंड में 45 वर्ष से अधिक आयु वालों के कम अनुपात में वैक्सीन लगाया गया है।

Posted By: Shailendra Kumar

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