Shani Amavasya 2021: दिसंबर महीने का पहला शनिवार धार्मिक मामले में काफी महत्वपूर्ण है। इस दिन वर्ष का आखिरी सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। वहीं पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह की अमावस्या 4 दिसंबर शनिवार के दिन पड़ रही है। शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या का बेहद महत्व है। इसे शनिश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 4 दिसंबर को पड़ रही है। शनिश्चरी अमावस्या के दिन जातकों को शनि देव की पूजा करनी चाहिए। जिससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रकोप कम होता है। वह शनिदेव भक्तों को आर्शीवाद देते हैं। आइए जानते हैं कुछ आसान उपाय, जिससे कर्मफल दाता प्रसन्न होंगे।

पीपल में जल अर्पित

गीता में भगवान श्री कृष्ण ने खुद को पीपल के वृक्ष के समान बताया है। तभी से पीपल के पेड़ का पूजन किया जाता है। जातक शनिश्चरी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें। वहीं पितृ दोष से मुक्ति के लिए शाम के समय पीपल के पेड़ पर गाय का दूध और जल मिलाकर चढ़ाए। फिर पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

काले कुत्ते को रोटी खिलाएं

शनिश्चरी अमावस्या के दिन काले कुत्ते को सरसों तेल से बनी रोटी खिलाएं। शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से शनि देव खुश होते हैं। इस दिन काला तिल, वस्त्र, उड़द की दाल,जूते-चप्पल, कंबल आदि भी दान कर सकते हैं।

व्यापारी करें ये उपाय

व्यापारी शनि अमावस्या के दिन दुकान या ऑफिस के गेट पर घोड़े की नाल लगाएं। ऐसा करने से व्यापार में बढ़ोतरी होती है।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Posted By: Arvind Dubey

 

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